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कदम्ब का पेड़ / सुभद्राकुमारी चौहान

ये कदम्ब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे,
मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे..॥

ले देती यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली, 12 और  शब्द

Hindi Poetry

ऐसी तोह ना थी मै||

ऐसी तोह ना थी मै…

थोड़ी सी पगली थी,

पर बहुत अपनी सी थी…

खुद की उम्मीदो पर खुब उतरने वाली,

एक बच्ची थी मै…

रात दिन एक कर,

सपनो को साकार करने वाली,

खुब लड़ने झगड़ने वाली,

एक बच्ची थी मै…

प्यार भी करना आता था,

और…

जोखिम भी उठाना आता था…

लक्ष्य से दूर रहकर भी,

लक्ष्य के करीब रहना आता था…

नासमझ थी,

पर दिल साफ था…

आज भी दिल साफ है,

पर लोगो को साफ दिल की आदात क्हा रही?

Poems

इंसानियत

नजरिये अलग है साहब
आप हिंदू, जैन, बौद्ध, ईसाई, और मुसलमान कहते हैं,
हम तो सब को एक ही माला का अंग समझ इंसान कहते हैं,,
©शिवम दूबे

Hindi Poem

Deep in the Stillness-  सन्नाटे में दूर तक

Deep in the Stillness

He threw me away
like a clod of earth.
He didn’t know
I was a thing with a soul.
He didn’t know… 173 और  शब्द

Poetry

चुनिंदा अशआर- बशीर बद्र (3)

धूप की चादर मिरे सूरज से कहना भेज दे
गुर्बतों का दौर है जाड़ों की शिददत है बहुत
……

उन अँधेरों में जहाँ सहमी हुई थी ये ज़मीं

Poetry

है रचा बसा हर एक कण में

एक दिन सुबह सुबह मन्दिर के बाहर हंगामा सुना तो कारण जानने की जिज्ञासा मन में हुई और जा पहुँची घटना स्थल पर | जाकर देखा तो कुछ लोग मन्दिर से कुछ दूर खड़ी एक कार को हटवाना चाहते थे | कार जिस लड़की की थी वह बाथरूम में थी और ऑफिस जाने के लिये तैयार हो रही थी | 8 बजे तक उसे घर से चले भी जाना था | उसकी माँ को ड्राइविंग आती नहीं थी | पास जाकर देखा तो कार मन्दिर से इतनी दूरी पर थी कि मन्दिर में आने जाने में कोई रुकावट नहीं थी | यदि दो लाइन बनाकर भी जाना होता तब भी पूरा रास्ता खुला था | और साथ में मन्दिर का मुख्य द्वार तो पूरी तरह ख़ाली था, वहाँ तो कोई वाहन नहीं खड़ा था | इस पर पण्डित जी और दूसरे भक्तगणों का तर्क था कि “कार भगवान जी की मूर्ति के सामने आ रही है |” जबकि ऐसा भी बिल्कुल नहीं था | ये सब देखकर मैं सोचने लगी कि धार्मिक स्थलों के नाम पर इस तरह की बेहूदा हरकतें आख़िर क्यों ?

हिन्दी साहित्य

3 लाईनें 

दर्द के सहरा में

प्यार के बादल गरजते तो हैं

पर मुहब्बत की बारिश नहीं होती

Dard