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एहसास

मन भर आता है कभी और कुछ नहीं बस गले लगा लिया करो
कभी छलक भी जायें आंसू तो और कुछ नहीं मुस्कुराहट अपनी हमारे नाम किया करो
दिल का दर्द है हर किसी को दिखाया नहीं जाता
मन का अंतरद्वन्द है आपसे जताया भी नहीं जाता
दर्द है ऐसा के बताएं तो बताया भी नहीं जाता
अंधेरों में भटकते रहते हैं रौशनी की तलाश में
सांसों की खिर्चन बाकी है अब भी इस लाश में

Hindi Poems

हवा के रंग में दुनिया पे आश्कार हुआ
मैं क़ैद-ए-जिस्म से निकला तो बे-कनार हुआ

आश्कार = clear, manifest, visible, व्यक्त, प्रकट, ज़ाहिर, स्पष्ट, साफ़ 49 और  शब्द

Poetry

हाईकू

वो कहते हैं हमसे

प्यार करना मगर

शर्तों पे

सलीका होता है

प्यार करने

का भी एक तरीका होता है

हम ही नासमझ रहे

बातें तुम्हारी समझ

न सके और दिल तुड़वा बैठे

Hindi Poems

गोविंदेव जी

हम कितना भी पीछा छुड़ाए

ये हैं कि हर बार सामने चले आते हैं

क्या करें फिर मोह लेते हैं मोरे गोविंदेव

पर बस यही और कोई मूरत तिहारी

न भाये कान्हा

क्या करें धोका हुआ है हमारे साथ

बरसाने वाली मूरत की आड़ में

राधाकृष्ण अब बस दर्द की याद हैं

Hindi Poems

तुम्हारे लिये

लाल गुलाब पे पड़ी ओस की बूंदों में

अक्स तुम्हारा इस कदर लुभाता है

मैं समा जाऊँ तुम मे और भूलूं संसार

तुम जो मुस्कुरा दो

रुहानी हो जाये समां

तुम पर करदूं जां निसार

आओ कभी महफिल में मेरी

बिछ जाऊँ कदमों तले

बन शमा फिर जलूं

Hindi Poems

चीथड़े में हिन्दुस्तान हैं... दुष्यन्त कुमार

एक गुड़िया की कई कठपुतलियों में जान है,
आज शायर ये तमाशा देख कर हैरान है।

ख़ास सड़कें बंद हैं तब से मरम्मत के लिए,
यह हमारे वक्त की सबसे सही पहचान है।

एक बूढा आदमी है मुल्क में या यों कहो,
इस अँधेरी कोठारी में एक रौशनदान है।

मस्लहत-आमेज़ होते हैं सियासत के कदम,
तू न समझेगा सियासत, तू अभी नादान है।

इस कदर पाबंदी-ए-मज़हब की सदके आपके
जब से आज़ादी मिली है, मुल्क में रमजान है।

कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,
मैंने पूछा नाम तो बोला कि हिन्दुस्तान है।

––दुष्यंत कुमार जी की रचना

Hindi Poetry

ग़ज़ल - शहरयार

बताऊँ किस तरह अहबाब को आँखें जो ऐसी हैं
कि कल पलकों से टूटी नींद की किर्चें समेटी हैं

सफ़र मैंने समंदर का किया काग़ज़ की कश्ती में

Poetry