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बड़े दुलार से राखी बांधा करती है

बड़े प्यार से निहारा करती है

उसके होने पे मेरी कलाई इतराती है

वो जब उसे बड़े प्यार से सजाती है

तो मैं खुशी  से फ़ूला नहीं समाता

सोचो ज़रा “बहने” न होती तो

हमारी कलाई कौन सजाता

और हमें भाई कौन बुलाता

विवेकानंद जोशी

बंधन एक प्यारा है

धागा सा रेशम का

प्यार है एक बहन  का

चमकते सितारे सा

जीवन ये उजियारा है

बंधन एक प्यारा  है

खुशियों के किस्से तेरे

मेरे हर हिस्से तेरे

घर की रौनक है तुझसे

तू सबकी आँखों का तारा है

अल्फ़ाज़ों पे मेरे आवाज़ हो तेरी

ऐसा रिश्ता हमारा है

बंधन एक प्यारा है

दुआ दिल से निकले हर बार

छाओ उस अर्श पर तुम

मिले खुशियाँ अपार

मुबारक हो तुम्हे रक्षाबंधन का त्यौहार

ये त्यौहार हमारा है

 बंधन एक प्यारा है

                            विवेकानंद जोशी

हिन्दी कविता

Post #13 बंधन एक प्यारा है

बंधन एक प्यारा है

धागा सा रेशम का

प्यार है एक बहन  का

चमकते सितारे सा

जीवन ये उजियारा है

बंधन एक प्यारा  है

खुशियों के किस्से तेरे

मेरे हर हिस्से तेरे

घर की रौनक है तुझसे

तू सबकी आँखों का तारा है

अल्फ़ाज़ों पे मेरे आवाज़ हो तेरी

ऐसा रिश्ता हमारा है

बंधन एक प्यारा है

दुआ दिल से निकले हर बार

छाओ उस अर्श पर तुम

मिले खुशियाँ अपार

मुबारक हो तुम्हे रक्षाबंधन का त्यौहार

ये त्यौहार हमारा है

 बंधन एक प्यारा है

                      विवेकानंद जोशी

हिन्दी कविता

Post#11 TRIVENI BY GULZAR

Triveni is the new style of poetry introduced by the legendary poet and lyricist Gulzar.It is a collection of three misras(one line of a couplet) in which the first two misras are as like in a shayari but the third misra gives it a different dimension or adds a new flavor to its meaning… 103 more words

हिन्दी कविता

Post#10 चाहत

चाहत 

  चाहत  का  तेरी जादू था

 मेरा अपने दिल पर

 अब न काबू था

 तू ही सपनों में आये मेरे

  देखे मैने जितने चेहरे

  मेरी  नज़रों पर

  अदाओं के पहरे

 हर चेहरे में बस तू ही तू

चाहत  का  है   तेरी जादू

मेरा नहीं ख़ुद पर काबू

धड़कन की बजती सरगम

 गीत तेरे ही गाये हर दम

 प्यार में तेरे बेक़रार था

 मेरा सुकूं भी

 अब फरार था

                       ढून्डे  बस एक तेरी खुशबू

                         चाहत  का  है   तेरी जादू

यादों में है  वो एहसास

 जब से तू है दिल के पास

  जी करता है

 खुल के बयाँ करूं

 कुछ एसा है

 तेरी चाहत  का जादू

                             – विवेकानन्द जोशी

Love

Post#9 मैं चुप नही रहूँगी

मैं  चुप नहीं रहूंगी” एक कविता जो की एक बदलाव का इशारा करती है।  आज की नारी की ताक़त और आत्मबल को दर्शाते हुए ज़माने को चुनौती देकर इन्साफ चाहती है -विवेकानंद जोशी

मैं चुप नही रहूँगी

नही अब बस

नही बेबस

यही ललकार

के जस का तस

चले ये सब

ये नही ज़रूरी

दिए जो घाव मुझे उसने

मैं नही हूँ भूली

वो जो भी हो

ये जाने वो चढ़ जाएगा वो सूली

के जिसने मुझको लूटा

है इतिहास नही परिहास
करे वो रास बनूँ मैं दास
ये मैंने नही कबूला

नही इक़रार है तक़रार
के तुझको खुली चुनौती
बने जो कर नही है डर
के तू ये कैसे भूला
है मेरा हक़ जो जीवन है
ये तेरी नही  बपौती
इसको तूने कैसे लूटा

सहेगा तू भयानक दर्द
जो तूने मुझको दिया
किया है प्रण
नही  कुछ कम चाहेंगे हम
के बस तेरी जान फ़िरौती

जागें वो सब
जो कहते हैं
के अब तुम कैसे जियोगी
ये बदला है
ये बतलाने
के अब मैं चुप नही रहूँगी
नही अब बस
नहीं अब बस
मैं चुप नही रहूँगी

विवेकानंद जोशी

 

हिन्दी कविता

Post#8 a poem for and about mother dedicated to the motherhood

हाँ अब  तुम आ गए हो । 

एक नन्हा सा फ़रिश्ता 

कुदरत ने भेजा है 

ज़मीं ने की रहनुमाई है 

                 

                 “महक” ताज़ा हुई है 

                 “बाग़” की हमारे 

                 एक  नया “फूल” जो खिला है 

                 बरस रहीं हैं पंखुरियां गुलाब 

                 की आसमां से 

                 नाज़ुक पैर तुम्हारे नर्म करने को 

 

जो अब तुम आ गए हो 

तो वो मुलायम एहसास 

तुम्हे छूने का 

बस  मुझे महसूस करने दो 

                      सांसों को तुम्हारी

                 सांसों में मेरी 

                 अब ज़रा भर लेने दो

                 हाँ अब तुम आ गए हो 

                 ये यकीन कर लेने दो

 

तुम्हारी  किलकारी से गूँज उठी 

ये फिज़ा सारी 

अब नयी लोरियाँ सीखने की 

तयारी ज़रा कर लेने दो

 

                 एक बार फिर ये यकीं 

                 कर  लेने  दो 

                 की तुम आ गए हो 

                 इस  पल को आज 

                 जी भर के जी लेने दो || 

                                     

                         – विवेकानन्द जोशी 

                         email id- joshivivek582@gmail.com

 

                                                    

 

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Post#6 आज़ादी FREE FOREVER

आज़ादी

आते जाते रास्तों पे जो मिल जाती
कहीं बैठे ठाले यूँ ही दिख जाती
हर पल हर जगह होती आज़ादी
मुझे गुदगुदाती आज़ादी
जशन मनाती आज़ादी
दिल में है जो कहती आज़ादी
सेल्फ़ी लेती आज़ादी
चाय की चुस्कियों से गप्पे लड़ाती आज़ादी
दोस्तों यारों दिलदारों की आज़ादी

कंगन में खनकती माथे पे चमकती
बचपन के आँगन में इतराती आज़ादी
बेफिक्र पल पल मुस्कराती आज़ादी

लफ़्ज़ चुन लेने की आज़ादी
ख़्वाब बुन लेने की आज़ादी

थोड़ी सी झल्ली है थोड़ी पगली है
क्या मेरी क्या तुम्हारी
हम सब की है आज़ादी
सिर्फ एक दिन नहीं
उम्र भर की है आज़ादी

-विवेकानंद जोशी

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