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नज़्म - गुलज़ार

ख़लाओं में तैरते जज़ीरों पे चम्पई धूप देख कैसे बरस रही है
महीन कोहरा सिमट रहा है
हथेलियों में अभी तलक तेरे नर्म चेहरे का लम्स एेसे छलक रहा है
कि जैसे सुबह को ओक में भर लिया हो मैंने
बस एक मध्दम-सी रोशनी मेरे हाथों-पैरों में बह रही है

तेरे लबों पर ज़बान रखकर
मैं नूर का वह हसीन क़तरा भी पी गया हूँ
जो तेरी उजली धुली हुई रूह से फिसलकर तेरे लबों पर ठहर गया था

ख़लाओं – शून्य , जज़ीरों – द्वीप ,  लम्स – स्पर्श

गुलज़ार ( कुछ और नज़्में )

Poetry

किरदार छोटा है - Selfishness affects the personality

​तीन मुक्तक

1-
बहुत ऊँची ईमारत है तेरी, किरदार छोटा है,
तुम्हें लोगों से क्या मतलब, तेरा व्यवहार छोटा है,
जुटा ली है करोङो की अगर दौलत चुरा करके,
तुम्हारी सोच छोटी है, दिल-ए-बाजार छोटा है।

2-
मैं घायल हूँ, मेरे जख्मों पे जो मरहम लगा देते,
अँधेरा है मेरे घर में, कोई दीपक जला देते,
अगर इंसानियत होती जरा सी यार तेरे में,
संभाला था तुझे गर्दिश में, थोड़ा हौसला देते।

3-
मेरे दिल में छुपा कोई मुझे आवाज़ देता है,
पकड़ता हूँ कलम जब भी, मुझे अल्फ़ाज़ देता है,
बयाँ करना बड़ा मुश्किल लगे मासूमियत इसकी,
मैं जब ग़ज़लें सुनाता हूँ, मुझे यह साज़ देता है।

Hindi Poem

प्रेम बन जाएगा ध्यान

मैंने देखा, और मैं देखती रही

मैंने सुना, और मैं सुनती रही

मैंने सोचा, और मैं सोचती रही

द्वार खोलूँ या ना खोलूँ |

प्रेम खटखटाता रहा मेरा द्वार

और भ्रमित मैं बनी रही जड़

खोई रही अपने ऊहापोह में |

तभी कहा किसी ने, सम्भवतः मेरी अन्तरात्मा ने

तुम द्वार खोलो या ना खोलो

द्वार टूटेगा, और प्रेम आएगा भीतर

कब, इसका भान भी नहीं हो पाएगा तुम्हें |

हाँ, यदि करती रही प्रयास इसे पाने का

गणनाएँ और मोल भाव

तो लौटना होगा रिक्त हस्त

क्योंकि रह जाएगा वह बाहर ही द्वार के |

क्या होगा, इसका प्रश्न क्यों ?

कैसे होगा, इसका चिन्तन क्यों ?

कितना होगा, इसका मनन क्यों ?

छोड़ दो ये सारे प्रश्न, विचार, चिन्तन और मनन

प्रेम के प्रकाश को करने दो पार सीमाएँ अपने समस्त तर्कों की

और तब, प्रेम बन जाएगा ध्यान |

ध्यान, जो तुम स्वयं हो

ध्यान, जो होगा तुममें

ध्यान, जो होगा तुम्हारे लिये

ध्यान, जो होगी तुम स्वयम् ||

हिन्दी साहित्य

​भाई दूज मनाती बहनें - Sisters! You're Great

भाई दूज मनाती बहनें।

भाई का त्यौहार विशेष,
कोई घर, कोई परदेश,
किन्तु हृदय में धारण करके
उनपर स्नेह लुटाती बहनें।

भाई दूज मनाती बहनें।

हास-उमंग हृदय में भरके,
गोवर्धन की पूजा करके,
देकर के आशीष हृदय से
सबका भाग्य जगाती बहनें।

भाई दूज मनाती बहनें।

सीमा पर जो खड़े जवान,
लेकर दिल में हिन्दुस्तान,
‘रहे सलामत, भाई मेरा,’
ईश्वर को गोहराती बहनें।

भाई दूज मनाती बहनें।

‘करें देव बहुविधि रखवाली,
साथ मनाएंगे दीवाली,
अगले साल मिलेगी छुट्टी,’
खुद दिल को समझाती बहनें।

भाई दूज मनाती बहनें।

Hindi Poem

प्रेम निमंत्रण

तुमने छेडे प्रेम के ऐसे तार हुजूर।

बजते रहते हैं सदा तन मन में संतूर।।

मधुमय बँधन बाँधकर कल लौटी बारात।

हरी काँच की चूडियाँ खनकी सारी रात।। …

हिन्दी कविता

ये दीवाली सैनिकों वाली.... 

​भारत के अमर जवानों को,उनके परिवारों को समर्पित इस दीवाली का हर दीप और ये कविता….

दहलीज अभी दहली होगी,आँगन स्तब्ध खड़ा होगा,

घर के कोने कलुषित होंगे,चूल्हे पे दर्द चढ़ा होगा…

मेरा भारत

ये ज़मीं जिस कदर सजाई गई

ये ज़मीं जिस कदर सजाई गई

ये ज़मीं जिस कदर सजाई गई
जिंदगी की तड़प बढ़ाई गई

आईने से बिगड़ के बैठ गए
जिनकी सूरत उन्हें दिखाई गई

दुश्मनों से ही बैर निभ जाए
दोस्तों से तो आश्नाई गई

नस्ल-दर-नस्ल इंतज़ार रहा
क़स्र टूटे न बेनवाई गई

ज़िंदगी का नसीब क्या कहिए
एक सीता थी जो सताई गई

हम न औतार थे न पैगंबर
क्यूं ये अज़्मत हमें दिलाई गई

मौत पाई सलीब पर हमने
उम्र बनवास में बिताई गई।
साहिर लुधियानवी ( जाग उठे ख़्वाब कई )

क़स्र-दुर्ग, बेनवाई-दरिद्रता, अज़्मत-महत्त्व महिमा

Poetry