टैग्स » Hindi Kavita

अक्शो का तिलिश्म

रो सकते तो क्या सुकून होता दिल को ,
इस तरह सरे आम , लिख कर ,
जस्बातो की नुमाईश न करनी पड़ती ,
बड़े किस्मत वाले है वो ,
Hindi

जुग़नू

खवाब भी मेरे थे ,मंजिल भी मेरी थी,
तुम आये तो ज़िन्दगी में रोशनी सी थी,
समझ न सका साथ जुग़नू का ,
जब रोशन मेरी मंजिल थी |
Hindi

बस मुस्कुरा देता हूं...

तुम याद आती हो अब भी रोज़, पर फिर मैं भुला देता हूँ,
दिल चाहता है तुमसे रूबरू होना, पर हसरतों को दिल में दबा देता हूँ,
आज भी उलझता हूँ, उन रूठे ख्वाबों को सहेजने में,
पर अब हकीकत की खुशी है इतनी,
कि जिन्दगी को कर शुक्रिया, बस मुस्कुरा देता हूं…
-सन्नी कुमार

मेरी कविता

मन की गांठ

मन की गांठ

बोई नहीं जाती

ग्लैडुला की गांठ की तरह

जो अपनी बगिया महकाए

भाए आँखों को

मन की गांठ

बांधी नहीं जाती

बंधनी की गांठ की तरह

जो अपना धरातल सजाए

ओढ़नी ओढ़ाए नातों को

मन की गांठ

लाई नहीं जाती

प्याज़ की गांठ की तरह

जो परत दर परत खुलती जाए

बढ़ाए रसोई के स्वादों को

मन की गांठ

लग जाती है

कर्कटी गांठ की तरह

दुखती चुभती फैलती जाए

टाल दो कर प्रेमयुक्त संवादों को

Relations

जिंदगी के रंग-15 कविता

जिंदगी इम्तिहान लेती है,

पर सबक भी देती है।

अगर

सही सबक लिया जाए।

जितना ज्यादा दर्द जिंदगी देती है

उतना ही, दर्द को

समझने की समझ भी देती है।

मंजिल

मंजिल  

अकेले ही तुम निकल पड़े ,
कितनी दूर , कहाँ तक जाओगे ?
बैठोगे ज्यों किसी बरगद की छावों  में
मुझे याद कर जाओगे

मैं तेज नहीं चल सकती
मेरी कुछ मजबूरियां हैं
और यह भी सच है, जो मैं सह न सकुंगी
तेरे मेरे दरमियाँ, ये जो दूरिया हैं

कुछ पल ठहरते
तो मेरा भी साथ होता
सुनसान राहों में किसी अपने का
हाथों में हाथ होता

कोई शक नहीं तुम चल अकेले
अपनी मंज़िल को पाओगे
पर देख मुझे जो मुस्कान लबों पे तेरे आती थी
क्या उसे दुहरा पाओगे ?

…….अभय ……..

Hindi

ख्वाबों के काफिले

तुमसे मिलने को नींद की रौ में
ख्वाबों के काफिले निकलते हैं
बरसती धूप में दहकते सेहरा से
बेधड़क धड़ा-धड़ निकलते हैं
कड़कड़ाती बिजलियों-बरसात में
शानो शौकत अजीमों शान से
तुमसे मिलने को नींद की रौ में
ख्वाबों के काफिले निकलते हैं
आंधियों की अंधी मार में
जलती हुई नारंगी शाम में
चक्रवाती तूफानी स्याह काली रात में
तुमसे मिलने को नींद की रौ में
ख्वाबों के काफिले निकलते हैं
तुम मिलो न मिलो यह मुकद्दर की बात है
पर मैं यह काफिला रोक दूं यह नागवार बात है