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'धरती और चाँद'

तुम्हें नहीं लगता?
धरती और चाँद,
संसार के सबसे प्राचीन प्रेमी हैं।

ज़रा देखो,
कैसे चाँद परेशान करता है धरती को,
जैसे बरसों पुराने प्रेमी हो।

कैसे वो पूर्णिमा की रात,
बरसा देता है भरपूर प्यार।
फिर अमावस की रात,
ग़ायब हो जाता है रूठकर।

ज़रा देखो,
कैसे धरती नहीं छोड़ पाती उसे,
और उसके हर रात बदलते प्यार के बावजूद,
बाँधें रखती है अपने कलेजे से।

तुम्हें नहीं लगता,
कि तुम भी चाँद ही सी हो?

(Artwork by Abhilasha Gulhane)

Poetry

यादें औऱ कुछ सवाल

एक दिन अचानक बस यूँही,मेरे दिल में कुछ ख्याल आया

तेरी यादें भी आयीं और कुछ सवाल आया

दिल की कश्ती कैसे निकले,अब चाहतों के भंवर से

समंदर इतना गहरा है,किनारों पर भी पहरा है

तेरी आँखों का नशा है,या मंज़र है ये तूफ़ान के पहले का

समंदर के सफ़र में इस तरह आवाज दो हमको

खुशनुमा हो जाए मेरा मन इतना प्यार दो हमको

उन लम्हों को जैसे तुम भूल सी गयी हो

ऐसा क्या कर दिया मैंने इतना दूर चली गयी हो

जरा पास आकर देखो फिर से प्यार का एहसास होगा

मुहब्बत की गलियों में हमारा भी एक नाम होगा

©Vibhor shukla

HINDI KAVITA

शहरी गर्मी

​ये कविता उस स्थिति के बारे में लिखी गयी है|

जब किसी नौकरी की तलाश में कोई बेरोजगार नौजवान युवा गांव से शहर का रुख करता है तो गर्मी में उसका हाल कुछ ऐसा हो जाता है-

साथी, सब कुछ सहना होगा - Harivansh Rai Bachchan

मानव पर जगती का शासन,
जगती पर संसृति का बंधन,
संसृति को भी और किसी के प्रतिबंधों में रहना होगा!
साथी, सब कुछ सहना होगा!

हम क्या हैं जगती के सर में!
जगती क्या, संसृति सागर में!
एक प्रबल धारा में हमको लघु तिनके-सा बहना होगा!
साथी, सब कुछ सहना होगा!

आओ, अपनी लघुता जानें,
अपनी निर्बलता पहचानें,
जैसे जग रहता आया है उसी तरह से रहना होगा!
साथी, सब कुछ सहना होगा!

Hindi Poems

आज दुनिया का जादू हटाया जाए

आज दुनिया का जादू हटाया जाए,
आज इस शाम की कदर हो जाए।

नारों से मोहित जनता रस्ता देखे बहारों का,
बेहतर हो अगर क़यामत का इंतजार किया जाए।

खुदा, इंसान, शैतान; क्या बने फिरते हो,
तुम बिको औकात-अनुसार जे रूपया रब कहाए।

भूला दो गाय, सूअर, बकरो को,
मुद्दा इंसान है, इनपर विचार बतलाएं।

क्या पर्दे, हिजाब, नक़ाब करे हो,
हटाओ तो चेहरा नजर आये।

Poems And Things Alike

चिर पहले सुना कि तेरी शादी आती है

चिर पहले सुना कि तेरी शादी आती है,
अब सामने आकर तू क्या बताती है।

मैं सदा तेरे इस गुण के प्रभाव में रहा,
किस सरलता से तू कठिन बातें कह जाती है।

तुम ना तो खुश दिखते हो, ना दुःखी
ये कैसी मुस्कान चेहरे पर तुमने पाली है।

मेरी आँखें नम ना हुई है,
तुम्हे ग़लतफहमी हुई है।

जाते-जाते जहाँ बसो वहाँ का पता लिख जाना,
आज से उस पते कदमों को मनाही है।

अब तो परदे कर लो खिड़कियों पर,
सब की ख़ुशी सब से देखी ना जाती है।

खाली हुआ गिलास, थोड़ी मय तो डालो
रुदन बाद में छेड़ेंगे, अभी विरह कमसिन है।

Poems And Things Alike

एक प्यारा सा बादल

अक्सर आँखों में आकर

कर जाता गीला काजल

एक प्यारा सा बादल

 

मैं छुईमुई सी घबराती

गरजन सी बातें करता

मुझसे आकर पागल

एक प्यारा सा बादल

 

मैं फुदकन सी गोरैया

नभ ऊँचा मुझे दिखाता

बिजली सी चमकाकर

एक प्यारा सा बादल

 

मैं आंगन की चंपा, चमेली

मेरी खिलती रंगत को

लेकर आता सावन

एक प्यारा सा बादल

 

जग का ताप झुलसा न दे

मेरी काया कोमल

छाया देता साथ में चलता

बनकर मेरी चादर

एक प्यारा सा बादल

Relations