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Yaaden : यादें

यादां मिसरी री डली, याद अगन री झाल |

याद अमोलक है सदा, राखीजे सम्हाल ।।

बैरन भी आ मीत भी, खारी, मीठी याद |

कदे हिलोरा दिल भरे, कदे करे नाशाद ||

जद कोई न संग हुवे, सखी बने है याद ।  

ईंके कारण ही हुवे, सूनो दिल आबाद।।

याद न होती साहिबा, कद का जाता भूल | 

साले तो आ शूल है, नहीं हिया रो फूल।।

याद हिये में राखणी, ना कहणी बतळाय । 

रस लेवे सब लोगड़ा, हाँसी और उडाय ।।

यादां रा इण फेर में,  हर ने रखजे याद ।  

मालिक मोटो जगत रो,  हर लेसी अवसाद।।

Bhav-abhivykti

Shiv Stuti : शिव-स्तुति

नमामि चित्त रंजनं महेश कष्ट भंजनं |

अपार मोद दायकं पिशाच भूत नायकं ||

किशोर चन्द्र भाल है गले भुजंग माल है |

विदेह देह मान हो अरूप रूप वान हो ||1||

भुजंग राज हारकं कपाल गंग धारकं |

मनोज मान जारकं समस्त लोक तारकं ||

प्रणाम नाथ आपको हरो समस्त ताप को |

अनूप कीर्ति आपकी महेश नाम जाप की ||2||

सदा रहो सहायकं समस्त लोक नायकं |

नमो महेश पालकं प्रदात भक्ति बालकं ||

अपार शील वान हो अमोघ देत दान हो |

उमेश आप ही सदा सहाय भक्त सर्वदा ||3|

रमेश ब्रह्म सेवितं मुनीन्द्र देव पूजितं |

करे हंमेश वंदना गणेश शैल नंदना ||

भजे सदा कुमार हैं गणादि बेशुमार हैं |

पुकार कान दीजिए उबार आप लीजिए ||4||

अनंत शोक टालते न लोक शूल सालते |

सदा ज भक्त तारते कराल काल मारते ||

अमोघ नाम ढाल है जहाँ अशक्त काल है |

प्रभो प्रताप पालिए हरेक कष्ट टालिए ||5||

दयालु चित्त धारिए दया करो उबारिए ||

तरे अनेक पातकी अपार कीर्ति आपकी |

उबार नाथ लीजिये दया उमेश कीजिये |

नमामि काम जीत को, रखे पाल प्रीत को ||6||          

करो दया ज दीन हूँ सदैव ही अधीन हूँ |

न और अन्य ठाँव हैं पड़े सदैव पाँव हैं ||

प्रणाम नाथ लीजिए हमेश भक्ति दीजिए |

जपे हमेश नाम को लभे तुहीज धाम को ||7||

प्रणाम भूतनाथ को प्रणाम लोकनाथ को |

नमो नमो मखारि को नमो नमो पुरारि को |

प्रणाम बार बार है उमेद की पुकार है ||

हमेश हाथ माथ हो सदैव नाथ साथ हो ||8||

शेष शारदा अज हरी, यक्ष गणेश अरु देव |

नर गन्धर्व किन्नर मुनि, सदा करे हैं सेव ||

Bhav-abhivykti

Jai Bharat: जय भारत

राष्ट्र प्रेम की निर्मल सरिता, जन जन के मन बहने दो |

मत अपने नारे बुलंद करो, हमें जय भारत ही कहने दो ||

क्षेत्र, धर्म, जाति, भाषा सब का, अपना निज स्थान यहाँ , 

कमतर, श्रेष्ठ क्यों साबित करते, सम सब को रहने दो |

मत अपने नारे बुलंद करो, हमें जय भारत ही कहने दो ||

हम संग सदा से रहते आये, तुम भेद बीज क्यूँ बोते हो ,

सुख जब हमने मिल बाँटा, तो पीर भी साझा सहने दो |

मत अपने नारे बुलंद करो, हमें जय भारत ही कहने दो ||

ये वतन हमारा, पहचान हमारी, जन्म-भूमि ये जननी है ,

मत और नई पहचान बनाओ, इसकी संतान ही रहने दो |

मत अपने नारे बुलंद करो, हमें जय भारत ही कहने दो ||

Bhav-abhivykti

Sankalp : संकल्प

मंज़िल मिल ही जाएगी, आज नहीं तो निश्चित कल |

मत ना अंधी दौड़ लगा, कदम कदम बस बढ़ता चल ||

पथ है तो पत्थर भी होंगे, ठोकर भी लग ही जाती है ,

गिरने वाले उठते भी हैं, लेकिन चलना अब सम्हल|

मंज़िल मिल ही जाएगी, आज नहीं तो निश्चित कल ||

इस जग में लो देख जरा, हर चीज बदलती पाओगे ,

ये किस्मत क्यूँ ना बदलेगी, राहों पर तो जरा निकल |

मंज़िल मिल ही जाएगी, आज नहीं तो निश्चित कल ||

भाग्य लकीरों संग में है, किन्तु परन्तु अवश्य लिखा ,

मेहनत से इन लेखों को, निज क्षमता अनुसार बदल |

मंज़िल मिल ही जाएगी, आज नहीं तो निश्चित कल ||

कितने असाध्य साध्य किए, हैं संकल्पों से मानव ने ,

सागर थाह,कदम व्योम में, ये सब हैं प्रयासों के फल |

मंज़िल मिल ही जाएगी, आज नहीं तो निश्चित कल ||

Bhav-abhivykti

दिवास्वप्न

एक सुनहरे स्वप्न से थी तुम , मेरी नीदो में आई ,

सोयी आँखों से सांसो तले,

बढ़ती हुई , सपनो में दबे,

हृदय में पिघलती  हुई,

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