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Dam Ghutata Hai : दम घुटता है

धुँआ धुँआ माहौल यहाँ, दम घुटता है, दम घुटता है |

घर के भीतर आज मनुज, अपनों के हाथों लुटता है ||

लगता है तुम बचे हुए हो ? पीठ पर खंजर ना खाए |

छोडो प्रेम, प्रीत की बातें, इन लफ़्ज़ों से डर लगता है ||

यह कैसा है चलन यहाँ, क्या ये ही अपनापन होता है |

जोर लगा पग सभी खींचते, जब ऊपर कोई उठता है ||

खोल जरा तुम देखो आँखे, सच में होता ऐसा पावोगे |

देते न सहारा, पर हंसते हैं, खा ठोकर कोई गिरता है ||

अय्याशों के मुख के ऊपर, सजती आदर्शों की बातें हैं |

और मनुज निज देख स्वार्थ, बन अनुयायी चलता है ||

सच के मुख पे सौ सौ ताले, यहाँ झूँठों की पौ बारह है |

शहीद स्मारक सूने सूने, और दर नेता मेला लगता है ||

मेहनत का फल मीठा होता, किसने कहा,क्या सोच कहा |

मध्यस्थ मजे से सब लूटे, नंगा कृषक धूप में तपता है ||

उर उमंग ना रही हंसी अब, मजबूरों पर नर हँसता है |

धुँआ धुँआ माहौल यहाँ, दम घुटता है, दम घुटता है ||

Bhav-abhivykti

मेरी ज़िन्दगी हो

जब जब तुम्हारे गेसुओं में आता हुँ, हर बार तुम को ज़िन्दगी कुछ नया नया सा पता हुँ , तुम्हारी स्याह आँखों से जितना नज़रे मिलता हुँ ,
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Sapno mein roz hi!!

Kagaz k panno par kuch alfaz likhe,

Ankho ko woh pal fir aj dikhe,

Woh beete lamhe woh jaagti raatein,

Sapno ne bhi aaj yahi sab dohraya, 57 more words

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Ab khaan : अब कहाँ

बनाया दिल को आईना, बस यही कसूर था |

उभरे ना उसमें अक्स तो, पल भी फितरतों के ||     

छाहें नसीबा अब नही, लो ये भी बदल गए |

गिरने लगे हैं देख लो, अब पत्ते दरख्तों  के ||

आये थे बनके कभी, दिले दौलत के पासबां |

ठग कर हमसे ले गए, वो लम्हे फुरसतों के ||

मय्यत में तो गैर भी, आते अदावत छोड़ के |

तन्हा मगर उठते हैं क्यों, जनाज़े हसरतों के ||

रहा ना यकीने यार अब, इस दौरे अय्याम में |

माने बदल गए हैं “देवल”, सच में उल्फतों के ||

Bhav-abhivykti

Kaagaz k Panno se!!

Tumhaare pass bhale Lakri ki nao nahi

Par fir bhi niraasha kaisi

Kaagaz k panne toh hai..

Nao banao aur kar lo poori duniya ki sair… 60 more words

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Prem-Pathik : प्रेम-पथिक

साथ जगत में पल दो पल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल |

प्रभात प्रतिदिन नव आशा लाता, मध्याह्न प्रचंडता देता है |

निस्तेज हो फिर जाता ढल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

मुड़कर ना भूत कभी लौटा है, ये आज ही हाथ तो अपने है |

किसने जाना क्या होगा कल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

साँसों के सागर को प्रतिपल, रहा उड़ा है वक़्त ये भाप बना |

बरसा दे प्रीत बनकर बादल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

सपने सहचर बंद आँखों के, जगते नयनों में सृजन सजता |

तूँ करता चल निर्माण नवल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

बहुतेरे निर्बल, दीन धरा पर, हैं व्यथित, वेदना नित सहते |

आया अवसर बन जा सम्बल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

पथ अवरोध खड़े करने की, इस जग की तो रीति पुरानी है |

खाकर ठोकर हर बार सम्हल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

इस जग में विजेता वो ही रहा, जिसने भी दिलों को जीता है |

आया अवसर ना जाए फ़िसल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

Bhav-abhivykti

मैं तो ज़िन्दा हुँ

मैं तो ज़िन्दा हुँ

तुम मुझसे प्यार  नहीं करती , दुःख नहीं ,

तुम को मुझसे इकरार नहीं , कोई गम नहीं ,

तुम को मेरे होने या न होने से फर्क नहीं, अच्छा है ,

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