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हटा दो

तो फिर हटा दो वो झूठे लाज का घूंघट
वो तौर तरीकों के जाले
वो नज़ाखत वो अदाएं …
फिर ही तो मिल पाओगे मुझसे तुम
बेबाक , बेशरम, बिना झूठ बिना सच
बिना खुद के , बिना मेरे ।

फिर हटा देना वो सोच के दायरे
मैं क्या देखूंगा
क्या सोचूंगा
क्या कहूँगा
जब आना मुझसे मिलने
तो बस अपनी रूह लाना…
नंगी, अनछुई,
ना साफ़ ना मैली।

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Zindagi Not So Happening - Peom

जब हुआ सामना मौत से,
ज़िन्दगी याद आ गयी
न मम्मी न पापा न भाई न बहना
न बंधू न मित्र न कोई गहना
बस वही ज़िन्दगी जिसे कभी नहीं माना याद आ गयी

Hindi Kavita

Baacho Ki Aapeksha - Hindi Kavita

मम्मी तुम मुस्कुराया करो
हमारी दुनिया सजाया करो
याद है हमें वह दिन
हमारे रोने पर तुम रोती थीं
हमारे खिलखिलाहट से तुम खिलखिलाती थीं
हमारे रूठने पर हमें मनाती थीं
हमारे ख़ुद में खो जाने पर ढूंढ के हमे वापस लाती थीं !

Hindi Kavita

आओ बसंत

आओ बसंत, छाओ बसंत
पुलकित हो मन, आनंद मगन

फूलों के रंग, परागों के संग
सरोवरों में बन कर कमल

ले कर सुगन्ध, आंगन भवन
बहकी चले, शीतल पवन

हर ओर करें भंवरे गुंजन
बागों में हो कोयल के स्वर

फूटे कपोल, सुन्दर चमन
सरसों के खेत, मंगल शगुन

तोतों के झुंड, दिखते गगन
बौरों में छिप बैठे अनंग

धरती सजे बनकर दुल्हन
उत्सव में हो हर एक कण

Relations

Realms of Lines

By: Aishwarya Raghunath

*The post was originally written in Hindi, the translation is slightly modified to put across the thought in a profound way.

Translation: 451 और  शब्द

Poetry

Hum vho gumnaam he...

hum vho gumnaam he jo apne he naam ki talash me he…
hai pair zami pe tike aur nazre jinki aasma me he…

sapno k basté bande hum isi talash me aage bad rahe he… 94 और  शब्द

Kamal Singh