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Yoon Zindgi:यूँ ज़िन्दगी

           तपती धूप सी ज़िन्दगी, तलाश छाँव कर रही |

          नज़रों  के सामने ही , हसरतें हज़ार मर रही ||

          गए न आये वो पलट, हमारी भी वो ही रहगुज़र |

         आप-धापी और न कुछ, उम्र यूँ ही गुज़र रही ||

         संवरने की चाह में, बहुत रखते हैं साफ़ आईना |

         दिल के दर्पण पे मगर, देखो रोज गर्द चढ़ रही ||

         एतबार न किसी का है, हम खुद जो बेयकीन हैं |

        हरेक आहट पर तभी तो, ये धड़कने  है डर रही ||

        बस्ती में रहते हम मगर, इंसान कोई बसता नहीं |

       इस गहमागहमी बीच में, है खामोशी पसर रही ||

Bhav-abhivykti

Bandar Mama Pehan Pajama - Hindi Poem for Kids - Minnu and Mintu Hindi Rhymes

Cute Hindi Nursery Rhyme with lyrics for your little ones

Bandar mama pehen pajama
Dawat khane aye
Bandar mama pehen pajama
Dawat khane aye , 162 और  शब्द

Hindi Nursery Rhymes

Machli Jal Ki Rani Hai - Hindi Rhymes for Kids - Minnu and Mintu Hindi Rhymes

One of the Popular Hindi Nursery Rhymes which let your kids know about Queen of Water :

Lyrics of the poem Machli Jal Ki Rani Hai: 97 और  शब्द

Hindi Nursery Rhymes

Aloo Kachaloo Kahan Gaye They - Hindi Kavita - Minnu and Mintu Hindi Rhymes

Funny Rhyme which learn your children Vegetables names in a very simple way.

Aaloo Kachaloo Beta Kahan Gaye The,

Baigan Ki Tokari Mein So Rahe The, 106 और  शब्द

Khamoshi:ख़ामोशी

                  नादान नहीं हूँ दिल में सबके, भाव समाये रखता हूँ |

                  मैं खामोशी की चादर में, जज्बात छिपाये रखता हूँ ||

                 ये जग है झूंठें लोगों का, कथनी करनी में फर्क रखे |

                 धोखे,दिखावे की दुनिया में, अस्तित्व बचाये रखता हूँ ||

                 मिलते हैं ऐसे मानो इन जैसा,अपना कोई और नहीं |

                 अनजान बना अपनेपन का, मैं भाव बनाये रखता हूँ ||

                 बैठेंगे आकर पास मगर, दिल में तो दूरियां होती हैं |

                 इस मक्कारों की बस्ती में, शब्दों को दबाये रखता हूँ ||

                 जायेंगे पलट कब ज्ञात नहीं, बन हमराही जो चलते हैं |

                 हो राहों में अँधेरा उससे पहले, दीप जलाये रखता हूँ ||

Bhav-abhivykti

Sanjeevani: संजीवनी

शव सम तन निश्चेष्ट में, लौटी फिर से जान |

                           शब्द सजन संजीवनी, सुनी पड़ी जब कान ||

Bhav-abhivykti

Vivash : विवश

विरहानल जियरा जले , जी भर सके न रोय |

साजन छवि अँखियन बसी, आँसूं दे न भिगोय ||

Bhav-abhivykti