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उम्र और पश्चाताप (A Hindi Poem On Regrets)

कभी ये कहा की कल ये करेंगे,
कहा कभी काश कल ऐसा हुआ होता।
बीत गया उम्र का हर पड़ाव जब
तब यही एक पाठ सीखा।

जो बीत गया कल वो
थोडा कड़वा थोडा फ़ीका,
कल याद कर कल भी खराब कर दिया
काश बदल दिया होता जीने का तरीका।

कुछ याद थी कुछ बाते थी
गम भी था , उसे की काश! कुछ और कर लिया होता,
कभी घर की सुनी तो कभी जहॉं की,
बस एक दिल की आवाज़ ही सुनना रह गया।

75 का है वो बुजर्ग सामने मेरे बैठा
जीना चाहता है वो फिर दुबारा
पर इस बार अपनी शर्तों पे अपने शौक के लिए,
पर वो जानता है की ये मुमकिन नही..
की मिल जाए ज़िन्दगी दुबारा।।

Life

..बस तुम्हे लगता है लड़की आम हो तुम!

कुछ हुई पूरी कुछ नही,
मेरी ख्वाशिएं तमाम हो तुम।
हफ़्तों से जो नही पी है मैंने
मेरी वो शराब हो तुम।।

जो लिखूँ उर्दू तो रहीम हो,
जो हो हिंदी तो राम हो तुम,
बह के नदी के साथ कुछ देर बाद
जो मिला मुझे, वो किनारा हो तुम।।

मत सोच की मोहब्बत है तुझसे या क्या
चाहत से ऊपर, और इश्क़ से थोडा नीचे।
जो होती है दीवानगी
मेरी उस दीवानगी का नाम हो तुम।।

जून की तपती दुपहर के बाद की
मीठी सी वो शाम हो तुम।
मिल जाए जब बच्चे को खिलौना कोई नया
उसके चेहरे की मुस्कान हो तुम।।

कहा तुमने मैं कुछ ख़ास नही,
फिर क्या वज़ह है तुम्हारी दीवानगी की?
तेरे हंस के देख लेने से हो जाए क़त्लेआम,
बस तुम्हे लगता है लड़की आम हो तुम!

Hindi

Akele

Jab tak samjha na tha jaana na tha,

apko jab humne apna mana na tha..

Tab aye paas jab saath tha na tha kisi ka, 130 और  शब्द

Hindi Poems

Dev Part-275

Casual
***
तेरी निगाह की लहरों में बह गये
~
कहना था अलविदा ,तेरे होकर रह गये

***
उदासियों की इतनी तलब भी अच्छी नहीं 31 और  शब्द

शायरी

उजाड़ी है जो दुनिया उसको फिर से बसाते है

उस  हरियाली से भरी सुहावनी सुबह का नज़ारा ही अलग होता था 

दिखाती थी माँ झूमते हुए पेड़ , जब भी कोई बच्चा  रोता था

पेड़ पर रोज़ चिड़िया के बच्चों से मिलकर आते थे  

मीठे मीठे अमरुद भी हमे खूब भाते थे 

जब लगती थी धुप तो पेड़ की छाव में सो जाते थे 

पर अब वो पेड़ की छाओं , वो हरे भरे गाँव कहीं गुम हो गए लगता है

जो बूढा चौकीदार सो जाता था पेड़ की छाव में, अब सारी रात जगता है

उन पेड़ों पर चहचहाती चिड़ियों को नया घर मिल गया है शायद

इसलिए अब चहचहाने  की आवाज़ नहीं आती

august, september क्या अब तोoctober भी निकल जाता है पर बरसात नहीं आती

हमे ज़िन्दगी ही नहीं हमे मुस्कराहट देने वाले पेड़ गायब हो रहे हैं 

इनको काटकर आपको अंदाजा भी नही होगा की हम कितना कुछ खो रहे है 

पेड़ो की हवा शायद रास नही आई इसीलिए अपनी ज़िन्दगी को मशीनो में कैद कर रहे है  

अपने ही कीये की वजह से आज लाखो लोग मर रहे है 

अब भी वक़्त है जल्द ही कुछ कर के दिखा दो 

कुछ लोग जाग चुके है कुछ को तुम जगा दो 

 कुछ शुरुआत कर चुके है हम इस मुहीम को आगे ले जाते है 

जो उजाड़ी है दुनिया हमने उसको फिर से खूबसूरत बनाते है 

कभी काटे थे हज़ारो पेड़ तो चलो 1 फिर से लगाते है 

पहले खुद को बदलो ये शहर ही नही ज़माना बदल जाएगा 

जब देश का हर आदमी हर बचा दिल से पेड़ लगाएगा

और ये मत सोचना की हम अकेले क्या कर सकते है 

एक एक करके जो मिल जाये सवा सौ करोड़ लोग तो देश ही नही ये दुनिया पलट सकते है 

                         :हितेश गुलिया

Main Kaha Shayar Hu..

Main kaha shayar hu.
Bas tooti mala ke kuch moti pirota hu.
Jakham jo sookh gaye hai, Jindagi ki garam havao se
Apne aansuo se bas unhe bhigota hu. 118 और  शब्द

Rubru

Kyuki har rang kuch kehta h..

Haapy holiiii…

this specially for holi occasion…..

Rango ka hai ye tyohaar

Kyuki har rang kuch kehta h

Lal rang h pyaar ka

Dil k nikhaar ka… 146 और  शब्द

Hindi Poems