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Atul Gawande on status of health systems in erstwhile India

—— You have very good people with a lot of experience and good training in India. But if you put some of your best and smartest people in dysfunctional systems, it’s demoralising for them and it is unsafe for the others. 34 more words

Mind Talking

शहद सेवन करने के नियम

शहद कभी खराब नहीं होता . यह पका पकाया भोजन है और तुरंत ऊर्जा देने वाला है |



शहद लेते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए |

– अमरुद , गाना , अंगूर और खट्टे फलों के साथ शहद अमृत के सामान है |

– चाय कॉफ़ी के साथ शहद ज़हर के सामान है |

– शहद को आग पर कभी ना तपाये |

– मांस -मछली के साथ शहद का सेवन ज़हर के सामान है |

– शहद में पानी या दूध बराबर मात्रा में हानि कारक है |


– चीनी के साथ शहद मिलाना अमृत मेंज़हर मिलाने के सामान है |

– एक साथ अधिक मात्रा में शहद लेनासेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है .दिन में २ या ३ बार एक चम्मच शहद लें |

– घी , तेल , मक्खन में शहद ज़हर के सामान है |

– शहद खाने से कोई परेशानी महसूस हो तो निम्बू का सेवन करें |

– समान मात्रा में घी और शहद ज़हर होता है |

– अलग अलग वृक्षों पर लगे छत्तों में प्राप्त शहद के अलग अलग औषधीय गुण होंगे . जैसे नीम पर लगा शहद आँखों के लिए , जामुन का डायबिटीज़ और सहजन का ह्रदय , वात और रक्तचाप के लिए अच्छा होता है |

– शीतकाल या बसंतऋतु में विकसित वनस्पति के रस में से बना हुआ शहद उत्तम होता है और गरमी या बरसात में एकत्रित किया हुआ शहद इतना अच्छा नही होता है। गांव या नगर में मुहल्लों में बने हुए शहद के छत्तों की तुलना में वनों में बनें हुए छत्तों का शहद अधिक उत्तम माना जाता है।

– शहद पैदा करनें वाली मधुमक्खियों के भेद के अनुसार वनस्पतियों की विविधता केकारण शहद के गुण, स्वाद और रंग मेंअंतर पड़ता है।

– शहद सेवन करने के बाद गरम पानी भी नहीं पीना चाहिए।

– मोटापा दूर करने के लिए गुनगुने पानी में और दुबलापन दूर करने के लिए गुनगुने दूध के साथ ले |

– अधिक धुप में शहद ना दे . गरमी से पीड़ित व्यक्ति को गरम ऋतु में दिया हुआ शहद जहर की तरह कार्य करता है।

– शहद को जिस चीज के साथ लिया जाये उसी तरह के असर शहद में दिखाई देते है। जैसे गर्म चीज के साथ लें तो- गर्म प्रभाव और ठंडी चीज के साथ लेने से ठंडा असर दिखाई देता है। इसलिए मौसम के अनुसार वस्तुएं शहद के साथ ले |

– ज्यादा मात्रा में शहद का सेवन करने से ज्यादा हानि होती है। इससे पेट में आमातिसार रोग पैदा हो जाता है और ज्यादा कष्ट देता है। इसका इलाज ज्यादा कठिन है। फिर भी यदि शहद के सेवन से कोई कठिनाई हो तो 1 ग्राम धनिया का चूर्ण सेवन करके ऊपर से बीस ग्राम अनार का सिरका पी लेना चाहिए।
-बच्चे बीस से पच्चीस ग्राम और बड़े चालीस से पचास ग्राम से अधिक शहद एक बार में न सेवन करें। लम्बे समय तक
अधिक मात्रा में शहद का सेवन न करें।

– चढ़ते हुए बुखार में दूध, घी, शहद का सेवन जहर के तरह है।

-यदि किसी व्यक्ति ने जहर या विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया हो उसे शहद खिलाने से जहर का प्रकोप एक-दम बढ़कर मौत तक हो सकती है।

Ayurveda For Improving Eyesight

There are various methods in Ayurveda to improve eyesight. If proper care for eye is not take, it can result into various eye conditions such as age related macular degeneration and cataracts, which is a leading cause of blindness in the world. 652 more words

Coconut Water:Nutrition Facts & Health Benefits

1. Reduce high blood pressure – Coconut water is high in potassium and some studies have reported that low levels of potassium has been linked to high blood pressure. 409 more words

RHEUMATOID ARTHRITS: Information in Indian System of Medicine

Treatment in AYURVEDA

Definition

Ayurvedic name: Amavata

Due to the hypo-functioning of ushma (Agni), the first dhatu viz. the rasa or chyle, is not properly formed and the anna-rasa undergoes fermentation or putrefaction (dushta) being retained in the amashaya. 429 more words

बच्चों को योग सिखाने के लाभ

– इससे बच्चें शांत होते है.

– आज के दौर में बच्चें भी बहुत तनाव में होते है. योग से उनका तनाव दूर होता है.

– योग बच्चों की एकाग्रता और संतुलन को बढाता है.

– योग करने से बच्चें सक्रीय और बेहतर जीवन शैली की ओर कदम बढाते है. – योग करने से बच्चों की नींद और अच्छी होती है.  – योग करने से बच्चों की कार्य प्रवीणता यानी मोटर स्किल में वृद्धि होती है. वे बारीक से बारीक और भारी से भारी काम ज़्यादा अच्छे से करते है.

– योग करने से बच्चों का पाचन अच्छा होता है . इससे उनके मुंह का स्वाद और भूख खुलने से वे सब कुछ खाना पसंद करते है. वे जंक फ़ूड से दूर रह पाते है. – योग से बच्चों में लचीलापन और शक्ति बढती है. – योग से बच्चें बेहतर तरीके से अपने विचार लिख-बोल पाते है. उनका आत्मविश्वास बढ़ता है. – योग से बच्चें अपने शरीर , मन , विचार और बुद्धि के प्रति जागरूक होते है. – योग करने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास होता है. – इससे बच्चों में रोग प्रतिकारक शक्ति का विकास होता है. बार बार सर्दी खांसी , अस्थमा और पेट की गड़बड़ी नहीं होती.  – बच्चों में किसी प्रकार की एलर्जी नहीं होती.  – बचपन में शरीर हल्का और लचीला होता है. कई आसन बचपन से ही करना चाहिए जैसे शिर्षासन. इससे बड़े हो कर भी वे अच्छे से सभी आसन कर पाते है.  – योग भारत का गौरव है इसे हर भारतीय को करते आना चाहिए. इससे देश के प्रति अभिमान में वृद्धि होती है.  – योग सीख लेने पर एक शैली में बच्चा निपुण हो जाता है. यह उसे अपने आगे के जीवन में बहुत काम आयेगा. – योग से प्राप्त लचीलापन , शारीरिक और मानसिक क्षमता अन्य खेल और कला सीखने में काम आएँगी. 

Odesity: Information in Indian System of Medicine

                                              AYURVEDA

Definition Ayurvedic Name: Sthaulya Excess deposition of fat on the body causing discomfort in routine activities and/or adverse effects on health is called sthaulya (obesity). 420 more words